नई दिल्ली, 7 मार्च 2026: क्रिकेट के मैदान पर कई बार बल्ला और गेंद की आवाजें दिलों को छू जाती हैं, लेकिन कुछ पल ऐसे होते हैं जो इतिहास के पन्नों में अमर हो जाते हैं। एलिसे पेरी, ऑस्ट्रेलिया की उस स्टार ऑलराउंडर का नाम लीजिए, जिसने महिला क्रिकेट को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। जब वह मैदान में उतरीं, तो न सिर्फ एक खिलाड़ी बल्कि एक प्रेरणा की तरह लगीं। खासकर 2017-18 एशेज सीरीज का वह टेस्ट मैच, जहां उन्होंने 213* रनों की ऐतिहासिक पारी खेली, क्रिकेट इतिहास के सबसे भावुक और यादगार पलों में शुमार है। यह पल न सिर्फ एलिसे पेरी की जज्बा की मिसाल है, बल्कि महिला क्रिकेट के संघर्ष और विजय की कहानी भी बयां करता है।
एलिसे पेरी का सफर किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं। सिडनी में जन्मीं यह लड़की बचपन से ही क्रिकेट और फुटबॉल के मैदानों पर छाई रहीं। मात्र 16 साल की उम्र में 2009 में ऑस्ट्रेलियाई टीम में डेब्यू करने वाली एलिसे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखते ही सबको हैरान कर दिया। उनका पहला टी20 इंटरनेशनल मैच ही इतना यादगार था कि लोग आज भी उसकी चर्चा करते हैं। लेकिन असली कमाल तब हुआ जब 2010 टी20 वर्ल्ड कप फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ उन्होंने अपनी गेंदबाजी से टीम को चैंपियन बनाया। वह पल जब ऑस्ट्रेलिया ने 3 रनों से जीत हासिल की, एलिसे की आंखों में चमक थी – एक किशोरी की आंखों में चैंपियन का सपना साकार होता दिख रहा था।
महिला क्रिकेट इतिहास में एलिसे पेरी का नाम सुनते ही लोग 2013 वनडे वर्ल्ड कप फाइनल की याद दिलाते हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ उस मैच में उनकी ऑलराउंड परफॉर्मेंस ने ऑस्ट्रेलिया को खिताब दिलाया। लेकिन ये सब तो बस शुरुआत थी। चोटों का सिलसिला शुरू हुआ – कमर की सर्जरी, हैमस्ट्रिंग की परेशानी – हर बार लगता था कि यह लड़की मैदान से दूर हो जाएगी। लेकिन एलिसे ने हार नहीं मानी। 2017 में जब एशेज सीरीज का टेस्ट मैच सिडनी के नॉर्थ सिडनी ओवल पर खेला गया, तो वह पल आया जिसने क्रिकेट प्रेमियों के दिल को छू लिया।
कल्पना कीजिए: ऑस्ट्रेलिया 5 विकेट पर 183 रन पर लड़खड़ा रही थी। इंग्लैंड की गेंदबाज केट क्रॉस और कैथरीन ब्रंट की जोड़ी धारदार थी। तभी मैदान पर उतरीं एलिसे पेरी। उनकी आंखों में आग थी, दिल में देशभक्ति का जज्बा। पहले दिन का खेल खत्म होने तक वह नाबाद रहीं, लेकिन असली जादू दूसरे दिन हुआ। एलिसे ने मेग लैनिंग के साथ साझेदारी निभाई और फिर अकेले ही पारी को संभाला। 213 गेंदों का सामना, 28 चौके और 7 छक्के – 213* रन! यह महिला टेस्ट क्रिकेट में पहली दोहरी शतकीय पारी थी। मैच खत्म होने के बाद जब स्कोरबोर्ड पर 280 रनों की बढ़त नजर आई, तो मैदान पर तालियां गूंजीं। लेकिन सबसे भावुक पल था जब एलिसे ने अपनी टीममेट्स को गले लगाया। आंसू बहते हुए उन्होंने कहा, “यह मेरी नहीं, हमारी टीम की जीत है। चोटों ने मुझे तोड़ा, लेकिन क्रिकेट ने जोड़ा।”
यह पल क्रिकेट इतिहास के सबसे भावुक क्षणों में क्यों शामिल है? क्योंकि यह सिर्फ आंकड़ों की जीत नहीं थी। एलिसे की यह पारी महिला क्रिकेट को वैश्विक पटल पर लाई। पहले जहां महिला मैचों को सीमित दर्शक मिलते थे, वहां अब स्टेडियम भरने लगे। एशेज सीरीज में ऑस्ट्रेलिया ने 10-0 से क्लीन स्वीप किया, लेकिन एलिसे की पारी ने इतिहास रचा। पूर्व कप्तान बेलिंडा क्लार्क ने कहा, “एलिसे ने साबित कर दिया कि महिला क्रिकेट पुरुषों से कम नहीं।” इंग्लैंड की कप्तान हीदर नाइट ने भी सराहना की, “उस पारी ने हमें हरा दिया, लेकिन प्रेरित भी किया।”
एलिसे पेरी की जिंदगी में भावुक पल यहीं खत्म नहीं हुए। 2020 टी20 वर्ल्ड कप फाइनल में मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर भारत के खिलाफ जीत के बाद उनकी आंखें नम थीं। 86,000 दर्शकों के बीच वह स्टेज पर खड़ीं, टीम को समर्पित भावुक भाषण दे रही थीं। “यह सपना था, जो सच हो गया,” उन्होंने कहा। चोट से वापसी के बाद 2023 एशेज में रनआउट का दर्द भरा पल भी यादगार रहा, जहां वह क्रीज पर खड़ी रह गईं, लेकिन अगले ही मैच में वापसी कर सबको चुप करा दिया।
WBBL में सिडनी सिक्सर्स के लिए खेलते हुए भी एलिसे ने कई यादगार पल दिए। 2018 में रेनेगेड्स के खिलाफ रनआउट का दुख, लेकिन 2024 में डबल सेंचुरी जैसी परफॉर्मेंस ने फैंस को रोमांचित किया। फुटबॉल में भी उनका योगदान कम नहीं – 2019 फीफा वुमेंस वर्ल्ड कप में गोल स्कोर कर मैटिल्डास को मजबूत बनाया। एलिसे की बहुमुखी प्रतिभा ने उन्हें ‘गोल्डन गर्ल’ का खिताब दिलाया।
आज जब हम एलिसे पेरी की बात करते हैं, तो महिला क्रिकेट के विकास की कहानी सामने आती है। ICC ने उनके सम्मान में कई अवॉर्ड दिए, लेकिन सबसे बड़ा अवॉर्ड तो वह मैदान पर मिला जज्बा है। युवा लड़कियां उन्हें देखकर क्रिकेट अपनाती हैं। भारत में भी, जहां महिला क्रिकेट तेजी से बढ़ रहा है, एलिसे प्रेरणा स्रोत हैं। हर बार जब वह मैदान पर उतरती हैं, तो लगता है – इतिहास दोहराने की घड़ी आ गई।
एलिसे पेरी ने साबित कर दिया कि क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं, भावनाओं का संगम है। उनके उस 213* की पारी ने न सिर्फ एशेज जीता, बल्कि लाखों दिलों को जीत लिया। अगली बार जब कोई मैच देखें, तो याद रखें – मैदान पर उतरना आसान नहीं, लेकिन एलिसे की तरह जज्बे से खेलना ही असली जीत है।
