Saina Nehwal Retirement: नई दिल्ली- भारतीय बैडमिंटन की चमकती सितारा और ओलंपिक कांस्य पदक विजेता साइना नेहवाल ने आखिरकार अपने शानदार करियर को अलविदा कह दिया है। 35 वर्षीय इस दिग्गज खिलाड़ी ने एक पॉडकास्ट में खुलासा किया कि उनके घुटने की पुरानी समस्या ने उन्हें मजबूर कर दिया है कि वे अब और नहीं खेल सकतीं। “मैंने सोचा कि अब बहुत हो गया। मैं और नहीं झेल सकती,” साइना ने भावुक होकर कहा। इस घोषणा के साथ ही भारतीय खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई, जहां प्रशंसक और साथी खिलाड़ी उनकी उपलब्धियों को याद कर भावुक हो उठे।
साइना नेहवाल का संन्यास बैडमिंटन जगत के लिए एक बड़ा झटका है। वे विश्व की पूर्व नंबर एक खिलाड़ी रह चुकी हैं और लंदन ओलंपिक 2012 में कांस्य पदक जीतकर भारत की पहली महिला बैडमिंटन खिलाड़ी बनीं जिन्होंने ओलंपिक मेडल हासिल किया। उनके करियर की शुरुआत 2000 के दशक में हुई, जब उन्होंने इंडोनेशिया ओपन 2009 जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धमाल मचाया। उसके बाद कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण, विश्व चैंपियनशिप में पदक और कई सुपर सीरीज खिताब उनके नाम रहे। साइना ने भारतीय बैडमिंटन को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया और पीवी सिंधु जैसी युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनीं।

हालांकि, रियो ओलंपिक 2016 में लगी घुटने की गंभीर चोट ने उनके करियर को प्रभावित किया। पिछले दो वर्षों से वे कोई टूर्नामेंट नहीं खेलीं, आखिरी मैच 2023 सिंगापुर ओपन में था। साइना ने बताया कि घुटने की डिजेनरेशन इतनी बढ़ गई कि हाई-इंटेंसिटी ट्रेनिंग असंभव हो गई। “मैंने खेल में अपनी शर्तों पर प्रवेश किया और अपनी शर्तों पर बाहर निकली, इसलिए औपचारिक घोषणा की जरूरत नहीं समझी,” उन्होंने कहा। लेकिन अब इस पुष्टि के साथ ही उनके प्रशंसक उदास हैं।
खेल जगत की प्रतिक्रियाएं बेहद भावुक रही हैं। पूर्व कोच पुल्लेला गोपीचंद ने कहा कि साइना ने भारतीय बैडमिंटन को बदल दिया। पीवी सिंधु ने सोशल मीडिया पर लिखा, “आप हमारी हीरो हैं, दीदी। आपकी विरासत हमेशा रहेगी।” बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (बीएआई) ने भी बयान जारी कर उनकी उपलब्धियों की सराहना की। कई पूर्व खिलाड़ियों जैसे प्रकाश पादुकोण और ज्वाला गुट्टा ने भी श्रद्धांजलि दी। सोशल मीडिया पर #SainaNehwalRetires ट्रेंड कर रहा है, जहां फैन्स उनकी यादें साझा कर रहे हैं।

साइना नेहवाल का संन्यास न केवल एक खिलाड़ी का अंत है, बल्कि एक युग का समापन है। उन्होंने महिलाओं को खेल में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया और पद्म भूषण, खेल रत्न जैसे सम्मानों से नवाजी गईं। अब वे शायद कोचिंग या मेंटरिंग में योगदान देंगी, लेकिन कोर्ट पर उनकी कमी हमेशा खलेगी। भारतीय बैडमिंटन के लिए यह एक नई शुरुआत का मौका भी है, जहां युवा खिलाड़ी उनकी राह पर चलें।
साइना की कहानी संघर्ष, समर्पण और सफलता की मिसाल है। खेल प्रेमी उन्हें हमेशा याद रखेंगे।
