Gambhir Coaching Analysis: नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर की नियुक्ति के बाद से टीम का प्रदर्शन विभिन्न फॉर्मेट में काफी अलग-अलग रहा है। जहां टी20 क्रिकेट में भारत ने अपराजेय रहते हुए एशिया कप 2025 जीता और लगातार जीत दर्ज की, वहीं वनडे और टेस्ट में टीम को लगातार हार का सामना करना पड़ा है। 2024 से अब तक गंभीर के नेतृत्व में भारत ने तीन टेस्ट सीरीज और तीन वनडे सीरीज हारी हैं, जो प्रशंसकों और विशेषज्ञों के बीच बहस का विषय बन गया है।
गंभीर जुलाई 2024 में राहुल द्रविड़ की जगह हेड कोच बने थे। उनके कार्यकाल की शुरुआत सफेद गेंद क्रिकेट में शानदार रही। भारत ने 2025 आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी जीती, जहां आक्रामक बल्लेबाजी और गेंदबाजी की गहराई ने टीम को टूर्नामेंट में अविजित रखा। इसी तरह, टी20आई में भारत ने 35 मैचों में से 27 जीते, जिसमें एशिया कप 2025 का खिताब शामिल है। गंभीर की रणनीति में रोल फ्लेक्सिबिलिटी, मैच-अप आधारित गेंदबाजी और बेधड़क बल्लेबाजी ने टी20 को सुपरहिट बना दिया। लेकिन क्या यह टी20 माइंडसेट लाल गेंद और वनडे क्रिकेट में फिट नहीं बैठ रहा?
टेस्ट क्रिकेट में भारत की घरेलू अजेयता का अंत गंभीर के दौर में हुआ। 2024 में न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज 0-3 से हारना ऐतिहासिक झटका था। इसके बाद 2025 में दक्षिण अफ्रीका से घर पर 0-2 की हार, ऑस्ट्रेलिया से बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी 4-1 से गंवाना और इंग्लैंड के खिलाफ ड्रॉ ने सवाल खड़े कर दिए। विशेषज्ञों का कहना है कि गंभीर का टी20 स्टाइल टेस्ट में अनुकूलन की कमी दिखाता है, जहां धैर्य और लंबी पारी की जरूरत होती है। टीम की बल्लेबाजी में असंगति, सिलेक्शन में विवाद और रणनीतिक गलतियां उजागर हो रही हैं।
वनडे में भी कहानी मिली-जुली है। चैंपियंस ट्रॉफी 2025 की जीत के बावजूद, द्विपक्षीय सीरीज में हार का सिलसिला जारी है। श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया और हाल ही में 2026 में न्यूजीलैंड से घरेलू वनडे सीरीज हारना चिंताजनक है। न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे वनडे में हार के बाद सोशल मीडिया पर गंभीर को ट्रोल किया गया, जहां फैंस ने उनके कोचिंग को ‘अराजक’ बताया। क्या गंभीर की आक्रामक सोच वनडे में बैलेंस नहीं बना पा रही? टूर्नामेंट में सफलता मिली, लेकिन बाइलेटरल सीरीज में फ्लॉप प्रदर्शन 2027 वनडे वर्ल्ड कप की तैयारी पर सवाल उठाता है।
पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह ने स्प्लिट कोचिंग की बहस पर कहा कि अभी धैर्य रखने की जरूरत है, लेकिन अगर रेड-बॉल और व्हाइट-बॉल के लिए अलग कोच रखें तो गलत नहीं। गंभीर का रिकॉर्ड सफेद गेंद में मजबूत है, लेकिन टेस्ट और वनडे में सुधार की जरूरत साफ है। बीसीसीआई को अब सोचना होगा कि क्या गंभीर की रणनीति में बदलाव लाएं या नया दृष्टिकोण अपनाएं।
आने वाले टी20 वर्ल्ड कप में सफलता मिल सकती है, लेकिन टेस्ट चैंपियनशिप और वनडे वर्ल्ड कप के लिए रणनीति पर पुनर्विचार जरूरी। भारतीय क्रिकेट के भविष्य के लिए गंभीर पर सवाल उठना स्वाभाविक है। क्या वे इस चुनौती से उबर पाएंगे?
